विकास की गंगा बहाने के चक्कर में पानी से भरे तालाब को फोड़कर कई किसानों की फसल बर्बाद

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भरे तालाब को तोड़कर विकास कार्य करने की जिद से किसान हुए बर्बाद

कोटा ब्लाक के ग्राम पंचायत पणरापथरा में अमृत सरोवर योजना के तहत 19 लाख में तालाब का गहरीकरण कार्य किया जाना है जनपद पंचायत कोटा के द्वारा विभिन्न पंचायतों में तालाबों को चिन्हांकित कर मनरेगा योजना के तहत गहरीकरण का कार्य योजना तैयार की गई है इसी तारतम्य में ग्राम पंचायत पंडा पथरा में अमृत सरोवर योजना का काम चालू करने के लिए पानी से भरे तालाब को जेसीबी लगाकर तालाब के पार को फोड़ दिया गया जिससे आसपास के किसानों द्वारा गेहूं की लगाई हुई फसल बर्बाद हो गई जिसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई किसान राजकमल महेश्वरी के द्वारा बताया गया कि उक्त तालाब को छोड़ने के लिए सरपंच प्रतिनिधि रामचंद गंधर्व को ग्रामीणों द्वारा मना किया गया था कि कुछ दिन रुक कर तलाब का कार्य कराया जाए लेकिन सरपंच प्रतिनिधि रामचंद्र गंधर्व ने किसानों की नहीं सुनी ऐसे विकास कार्यों से किसान बहुत दुखी और चिंतित हैं कोटा ब्लॉक के अधिकतर ग्राम पंचायत में जहां सरपंच महिला है वहां उनके पति के द्वारा ही पूरी पंचायती की जाती है उच्च अधिकारी के नॉलेज मेंट में रहने के बाद भी वह किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं करते यह बात तो समझ से परे है जेसीबी लगाकर उक्त तालाब में रोजगार गारंटी के तहत कार्य करना यह नियम के विरुद्ध है और कहीं न कहीं अधिकारियों की उदासीनता के कारण ही पंचायत प्रतिनिधियों के पास ऐसी ताकत आ जाती है तलाब तोड़कर विकास कार्य करना यह कैसा विकास है यह समझ से परे है अब देखना यह है कि अधिकारी इस गंभीर मसले पर किस तरीके की कार्यवाही करते हैं

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