कोटा का गौरव डॉ. रजीत सिंह पवार: 60 वर्ष की उम्र में 40 किलोमीटर नंगे पांव दौड़कर पहुंचे बिलासपुर संघ कार्यालय

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नवरात्रि में नौ दिन का उपवास रखकर हनुमान मंदिर में टेका माथा, युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत

बिलासपुर – कोटा— ऊम्र महज एक संख्या है, यदि मन में दृढ़ संकल्प, शअनुशासन और जुनून हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। इस बात को चरितार्थ करते हुए कोटा के गौरव डॉ. रजीत सिंह पवार ने नवरात्रि पर्व के दौरान नौ दिनों तक उपवास रखकर 60 वर्ष की उम्र में 40 किलोमीटर की दूरी नंगे पांव दौड़कर तय की और बिलासपुर स्थित संघ कार्यालय के हनुमान मंदिर पहुंचकर बजरंगबली के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

डॉ. पवार का यह प्रयास न केवल उनकी आस्था, साधना और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचायक है, बल्कि नई पीढ़ी के बच्चों और युवाओं के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा है। संघ कार्यालय पहुंचने पर उन्होंने वहां उपस्थित सभी भैया को प्रणाम किया। उनके इस समर्पण और उत्साह से प्रभावित होकर संघ के सभी भैया ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

सेवा और संस्कार ही जीवन का उद्देश्य

डॉ. रजीत सिंह पवार का जीवन समाजसेवा, संस्कार और मानवीय मूल्यों को समर्पित रहा है। गायों की सेवा करना, वृद्धजनों की सेवा करना तथा छोटे बच्चों को अपने माता-पिता के प्रति सम्मान और प्रणाम करने के संस्कार देना उनके जीवन के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। उनका मानना है कि जीवन को किसी महत्वपूर्ण उद्देश्य के साथ जीना चाहिए, ताकि समाज और आने वाली पीढ़ियों को सकारात्मक दिशा मिल सके।

खेल जगत में भी दिया महत्वपूर्ण योगदान

डॉ. पवार ने अपने खेल कौशल और मार्गदर्शन के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के वॉलीबॉल खिलाड़ी तैयार किए हैं। खेल के प्रति उनका समर्पण युवाओं के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने बताया कि दौड़ना उनके लिए केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि एक साधना है। वे 40 से 46 डिग्री सेल्सियस तक के भीषण तापमान में भी अभ्यास करते रहे हैं, जो उनके अनुशासन और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।

सम्मान और उपलब्धियों से बढ़ाया क्षेत्र का गौरव

डॉ. रजीत सिंह पवार को हरिहर ऑक्सीजन संस्था के माध्यम से कलेक्टर एवं सांसद द्वारा ‘छत्तीसगढ़ मिल्खा सिंह’ के सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। इसके अलावा, खेल और शोध के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त होने की जानकारी भी दी गई है।

परिवार और मित्रों को दिया सफलता का श्रेय

अपनी उपलब्धियों और जीवन की प्रेरणा का श्रेय डॉ. पवार ने अपने स्वर्गीय पिता भगवान सिंह पवार, माताजी, भाई-बहनों, डॉ. सपना पवार, डॉ. यामिनी जायसवाल, लता तथा अपने मित्रों को दिया है। उनका मानना है कि परिवार और मित्रों का सहयोग व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति देता है।

डॉ. रजीत सिंह पवार की यह 40 किलोमीटर की नंगे पांव दौड़ केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि आस्था, साधना, सेवा और संकल्प का संदेश है। उनका जीवन युवाओं को यह सीख देता है कि लक्ष्य के प्रति समर्पण, बड़ों का सम्मान और समाजसेवा की भावना ही व्यक्ति को वास्तविक गौरव प्रदान करती है।

कोटा के लिए गौरव बने डॉ. रजीत सिंह पवार का यह प्रयास निश्चित ही नई पीढ़ी को अनुशासन, संस्कार और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता रहेगा।

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